स्मार्ट सिटी में पिछड़ा झारखंड

पूरे झारखंड राज्य में सिर्फ रांची को ही स्मार्ट सिटी बनाने के लिए पहले चरण में चुना गया है। दूसरी तरफ बिहार में मुजफ्फरपुर और भागलपुर का चयन हुआ है। जाहिर है कि पहले चरण में झारखंड से जमशेदपुर और धनबाद तथा बोकारा में से किसी एक को चुना जाना था। केंद्र सरकार ने अपनी पहली सूची में सिर्फ रांची को भी इसमें शामिल करने का फैसला किया है। अब तक स्मार्ट सिटी के चयन की प्रक्रिया का खुलासा नहीं हो सका है, इसलिए यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किन कारणों से राज्य के अन्य शहर इस दौड़ में पिछड़ गये। लेकिन यह सही समय है कि अगली सूची के जारी होने के पूर्व ही राज्य सरकार इस दिशा में गंभीरतापूर्वक काम करे और केंद्र की योजनाओं का लाभ उठाने में पिछड़ने से बचे। यह झारखंड का दुर्भाग्य है कि अनेक केंद्रीय योजनाओं में पैसा आवंटित होने के बाद भी राज्य में उचित संरचना की कमी की वजह से इन योजनाओं का लाभ राज्य नहीं उठा सका है। इसलिए अब स्मार्ट सिटी के मामले में झारखंड को पहले से ही सारी तैयारी कर लेनी चाहिए। वरना हर बार की तरह अंतिम समय में कागजी कार्रवाई पूरी करने की हड़बड़ी में आंकड़े और अन्य सूचनाओं की कमी की वजह से झारखंड को नुकसान होता है। रांची के स्मार्ट सिटी के पहले चरण में चुन लिये जाने के बाद अब ग्रेटर रांची और नई राजधानी की परिकल्पना पर भी नये सिरे से विचार करना होगा क्योंकि स्मार्ट सिटी की परिधि से बाहर इन दोनों परियोजनाओं को रखा जाना है अथवा उन्हें भी स्मार्ट सिटी के दायरे में लाना है, यह तय होना शेष है। सिर्फ रांची ही नहीं देश के अनेक शहरों का अनियमित और योजनाविहीन विकास की वजह से अब इन तमाम शहरों में नित नई परेशानी खड़ी हो रही है। हाल के दिनों में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है और शहरों पर जनसंख्या का दबाव आकलन से अधिक होने की वजह से वहां जन सुविधाओं में निरंतर कटौती हो रही है। अकेले रांची की बात करें तो मास्टर प्लान के तहत जब सिकिदिरी डैम की योजना बनी थी तो शहर में पांच लाख की आबादी के लिए तीन जलस्रोत उपलब्ध थे। इन जलस्रोतों के अलावा शहर को जलापूर्ति की नई योजना तो नहीं बनी पर राज्य की राजधानी बनने के बाद रांची की आबादी तेजी से बढ़ी। नतीजा है कि अब भी शहर के अनेक इलाकों में नियमित जलापूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं हो पायी है। जहां पाइप लाइन हैं, वहां भी पानी की चोरी और पाइप लाइनों के रख-रखाव में कमी की वजह से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। यही हाल बिजली आपूर्ति का है, जहां गली-मुहल्लों तक में घर बन चुके हैं पर बिजली की लाइन ले जाने की सुविधा के अभाव में वहां बिजली की अस्थायी व्यवस्था से काम चल रहा है। स्मार्ट सिटी बनाने के दौर में इस किस्म की तमाम परेशानियों को स्थायी तौर पर दूर करने की योजना पर सरकार को पहले से ही काम करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण इंतजाम सफाई का करना होगा। वर्तमान में रांची शहर की सफाई व्यवस्था बहुत ही लचर है। ऐसे में स्मार्ट सिटी बनाने के लिए वर्तमान शहर की सफाई व्यवस्था में स्थायी और नियमित सुधार का कोई प्रावधान किये बगैर हम सही मायने में स्मार्ट सिटी बनाने की दौड़ में पिछड़ सकते हैं। आबादी और वाहन बढ़ने की वजह से रांची में यातायात एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अब तक सरकार यह तय नहीं कर पायी है कि उसे रांची में फ्लाई ओवर बनाना है अथवा नहीं। इस किस्म की लेटलतीफी से स्मार्ट सिटी बनाने में झारखंड को नुकसान भी हो सकता है। वर्तमान में इन तीनों दैनिक आवश्यकताओं के लिए राज्य सरकार के स्तर पर दीर्घकालिन योजना पर काम प्रारंभ करना चाहिए ताकि अगले चरण का कार्य प्रारंभ होने अथवा स्मार्ट सिटी बनाने संबंधी राष्ट्रीय बैठक में भाग लेने वाले झारखंड के प्रतिनिधि पूरी तैयारी के साथ उसमें शामिल हो सकें। केंद्र सरकार ने पहले चरण
की स्मार्ट सिटी योजना के तहत 48 हजार करोड़ रुपया का प्रावधान किया है। लिहाजा एक शहर के नाते भी झारखंड में इसमें उसका हिस्सा मिलेगा। यह हिस्सेदारी राज्य की अपनी तैयारियों के आधार पर होगी और पूर्व के अनुभव यही बताते हैं कि झारखंड को कागजी विकास के नाम पर पूर्व में काफी नुकसान सिर्फ इसलिए हुआ है क्योंकि हम बिना तैयारी के केंद्रीय योजनाओं का पैसा लेने का प्रयास करते रहे हैं। दूसरी तरफ खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं करने की वजह से भी केंद्र सरकार झारखंड की दावेदारी को नकारती रही है।

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