फिर आयी पृथ्वी के तबाह होने की भविष्यवाणी 15 अक्टूबर से होगी शुरुआत

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः पश्चिमी देश इनदिनों अनजान खतरे को लेकर सशंकित हैं।वहां के कई स्तरों पर हुई भविष्यवाणी
इसके मूल में है। यह बताया गया है कि आगामी 15 अक्टूबर से इस दुनिया की तबाही का
क्रम प्रारंभ होगा।

सूनामी और भूकंप से इसकी शुरुआत होगी और अंततः कई किस्म की प्राकृतिक आपदाओं की वजह से इस दुनिया का अंत हो जाएगा। इस किस्म की भविष्यवाणी करने वालों का यह भी दावा है कि उनकी गणना सही है।

वैसे बताते चलें कि दुनिया के समाप्त हो जाने की ऐसी भविष्यवाणियां पहले भी होती रही हैं। पृथ्वी के पूरी तरह
समाप्त हो जाने की यह चर्चा कई सौ वर्षों से चली आ रही है।

कई वैज्ञानिक तर्क भी जोड़े

इस बार भविष्यवाणी करने वाले कुछ लोगों ने इसमें अंतरिक्ष विज्ञान को भी अपने तर्कों में जोड़ लिया है। उनका
कहना है क निबूरू या प्लानेट एक्स नामक एक तारा अचानक पृथ्वी से टकरायेगा। इस टक्कर से ही पृथ्वी के
अंत की शुरुआत होगी। इस तारा के टकराने की पहली तिथि सितंबर माह के 23 तारीख को बतायी गयी थी जो
अंततः गलत साबित हुई।उसके बाद से अब 15 अक्टूबर की यह तिथि घोषित की जा रही है।

क्या कहते हैं इसके समर्थक

इस किस्म के दावों में आगे रहने वाले डेव मीडे ने कहा कि सात वर्षों के इस काल खंड को जो समय प्रारंभ हो
रहा है वह अगले सात वर्षों तक जारी रहेगा। इसी दौरान प्राकृतिक आपदाओं की वजह से यह धरती तबाह हो
जाएगी। उनका अब भी दावा है कि तबाही की शुरूआत तो तारा के टकराने से ही होगी।

मीडे मानते हैं कि जब यह तारा पृथ्वी के पास आयेगा तो कई इलाकों में ज्वालामुखी भी फटना प्रारंभ हो जाएगा।
ऐसी सोच रखने वालों का मानना है कि इस शुरुआत तो 21 अगस्त को ही हो गयी थी जबकि सूर्य ग्रहण हुआ था।
मीडे की दलील थी कि मेक्सिको में भूकंप और टेक्सास में बाढ़ के अलावा कई इलाकों में लगातार भीषण तूफान
इसके ही संकेत हैं।

दुनिया तबाह होने की सोच रखने वाले मानते हैं कि विषम परिस्थितियों की वजह से महाशक्तियों के बीच परमाणु
युद्ध जैसी स्थिति भी बन सकती है। अमेरिकी लोग इसे अपने शत्रु पक्ष यानी रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया
को जिम्मेदार मानकर चल रहे हैं।

दरअसल इस चर्चा को अधिक तरजीह इसलिए मिली क्योंकि बाइबल में सितंबर 23 की तिथि का उल्लेख है।
दुनिया की समाप्ति की तिथि को सूरज, चांद और अन्य तारों की स्थिति से भी जोड़कर बताया जा रहा है। इसके
लिए समुद्र में पानी के उछाल यानी सूनामी को ही प्रारंभिक संकेत बताकर प्रचारित किया जा रहा है।

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