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दीपावली बाजार का पूरे साल तक रहता है इंतजार पर जीएसटी का असर इस बार

  • साल पर इंतजार रहता है इस बाजार का
    पूरे देश में एक साथ होती है खरीददारी
    जीएसटी पर असर समझना शेष है

छवि वर्मा
यूं तो दीपावली के विषय में हम सभी जानते हैं कि दिवाली कार्तिक महीने की अमावस्या की रात को मनाया जाता है।
वर्षा ऋतु के तुरंत बाद दीपावली का त्योहार उमंगों लिए आता है, जहां एक तरफ प्रत्येक व्यक्ति अपने घरों की साफ सफाई और सजावट करता है। वहीं बाजारों की रौनक भी चकाचौंध वाली बन आती है।
यह एक ऐसा त्योहार है जो पूरे भारत वर्ष में एक साथ मनाई जाती है।

इसलिए हम यह मान सकते हैं कि दीपावली ही इस देश का सबसे बड़ा ‘‘शॉपिंग सीजन’’ है।
इस मौके का इंतजार लोग साल भर करते है और इस ‘‘शॉपिंग सीजन’’ में महंगी चीजें खरीदते हैं।
छोटी-बड़ी गाड़ियां, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, रसोई की बर्तनें, कपड़े, मिठाईयां और तरह तरह के गिफ्ट आइटमों
की सबसे ज्यादा बिक्री इसी दीपावली सीजन में होती है।
निम्न और मध्यम आय वर्ग में देखा गया है कि वर्ष भर जमा किये गये पैसे को इस सीजन में खर्च करने में नहीं हिचकते और महंगी से महंगी खरीदारी करते है।
अमीर गरीब सभी अपने अपने सामर्थ्य के अनुसार घर प्रतिष्ठानों की सफाई और रंग रोगन जरूर करवाते हैं।

बाजार को भी रहता है दीपावली का इंतजार

दीपावलीऐसे में इस दीपावली बाजार का जिस तरह व्यवसायियों को इंतजार रहता है,
वैसे ही उपभेक्ताओं को भी। इसका सबसे बड़ा कारण। घरेलू जरूरतों के
सामानों पर आॅफरों की बौझार सी लगी रहती है, जैसे इलेक्ट्रोनिक आइटम,
छोटी बड़ी वाहनें, आभूषण,जमीन जायदाद,घरेलू उपकरण, रेडिमेड कपड़े
पर तो 10 से 70 प्रतिशत तक छूट का आॅफर दिया जा रहा है।

वहीं इस पर्व की सबसे बड़ा पहचान मिठाईयां और ड्राईफ्रूट पर संयोगवश कुछ विशेष आॅफर तो नहीं मिल रहा है।
वहीं व्यवसायी वर्ग जीएसटी के बहाने उपभेक्ताओं से ज्यादा पैसे वसूलने की तैयारी में है
इन सबके बावजूद दीपावली बाजार, आॅफर सीजन, छूट की बौछार और लुभावने विज्ञापनों के बीच बाजार और दुकानों में होड़ सी मची हुयी है।

बोनस से बढ़ी दीपावली बाजार की रौनक

सरकारी कर्मचारियों की दीपावली तो बल्ले-बल्ले सी हो गयी है बोनस के रूप में मिली एकमुश्त राशि ने उनकी दिवाली की रौनक बढ़ा दी है,
लेकिन आम जनता विशेषकर किसान की दिवाली इस वर्ष कुछ फीकी सी हो गयी है। कारण मौसम की बेरूखी और असमय बारिश।
व्यापार जगत में साल भर का लेखा जोखा की शुरुआत भी दिवाली के दिन से ही की जाती है।
इस वर्ष व्यापारी वर्ग कुछ परेशान नजर आ रहे हैं। क्योंकि इसी वक्त व्यापारियों को जीएस टी आर-3 बी रिटेल से संबधित अवधि की खरीद बिक्री का आकलन कर उसका विवरण डालना होगा।

जीएसटी का टंटा माथे पर

इस वर्ष जुलाई में ‘गुड्स एंड सर्विसेज’(जीएसटी)लागू होने के कारण दिवाली के मौके पर खरीददारी का माहौल अलग हो सकता है।
आपको खर्च और बचत दोनों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
जीएसटी लागू होने के बाद से चार स्तर में 5 प्रतिशत,12 प्रतिशत,18 प्रतिशत,और 28 प्रतिशत टैक्स लग रहे हैं।

हालांकि 6 तारीख में हुई वित्त विभाग की बैठक में फैसला लिया गया है कि 60 सेवाएं और वस्तुएं जीएसटी से हटाई जाएंगी।
18 प्रतिशत दायरे में आनेवाली कुछ वस्तुओं को 12 प्रतिशत के दायरे में लाया जाएगा।
इससे करीब करीब रोजर्मरा की 60 वस्तुएं सस्ती हो जायेंगी। जीएसटी मिठाईयों का स्वाद भी फीका कर रहा है,
ऐसे में दिवाली में रौशनी जलाना हो या पटाखा फोड़ना हो या फिर दोस्त रिश्तेदारों को तोहफा बांटना,
सभी चीजों के लिए आपकी जेबें हल्की पड़ सकती है।
ऐसे में इस ‘शॉपिंग सीजन में’व्यवसायी और उपभेक्ता दोनों संशय में नजर आ रहे हैं।

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