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योग से रहें स्वस्थ… मोटापा को करें दूर

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है… लेकिन ये दुर्भाग्य है कि हमारा शरीर लाख जतन के बाद भी निरोग नहीं रह पाता… कई बीमारियों से ये घिरा रहता है… इन्ही बीमारियों में से एक है मोटापा… जो आज अधिकांश लोगो के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है…

आज के दौर में मोटापा इतनी जटिल समस्या हो गई है कि Health Issue  को लेकर कई बड़ी बड़ी कंपनियां खड़ी हो गई है… जो वजन घटाने के नाम पर अपना व्यवसाय चलाती है… और इससे हर साल करोड़ों रुपये भी कमाती हैं…

वजन घटाने के हज़ारों तरीके बताये जाते हैं, पर इन सब तरीकों में एक ऐसा भी तरीका है जो पूरी तरह दोष रहित है… इसका side-effects नहीं है… और वो तरीका है योग… आज हम आपको वजन घटाने के कुछ ऐसे कारगर तरीके बताने जा रहे है… जो आपको इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा दिला देगा….

मोटापा कम करने के लिए योगासन

योग के तरीके अपनाकर हमारी प्राचीन संस्कृति में कई लाभदायक योगासन बताए गए हैं… जिस के नित्य प्रयोग से शरीर स्वस्थ और आकर्षक बन सकता है… और इन योग क्रियाओं से शरीर का वज़न भी कम किया जा सकता है। संतुलित आहार और योगासन की मदद से कोई भी अपना जीवन नयी ऊर्जा से सराबोर कर सकता है…

कपालभाती प्राणायाम  

कपालभाती कैसे करें

कपालभाती प्राणायाम करने के लिए पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन लगा कर सामान्य मुद्रा में बैठ जाएं। बैठे बैठे ही अपने दाएं पैर को बायीं जंघा के ऊपर और बाएं पैर को दायी जंघा के नीचे लगा लें। यह आसन जमाने के बाद, सांसों को बाहर छोड़ना होता है, और पेट को अंदर की और धकेलना होता है। इस क्रिया को सुबह के समय पांच मिनट करना चाहिए।

कपालभाती प्राणायाम करने के लाभ

यह आसन पेट की चर्बी घटाने का रामबाण उपाय है। इस गुणकारी आसन के प्रभाव से मोटापा घटाने में तो मदद मिलती ही है पर, उसके साथ साथ चहेरे की सुंदरता में भी निखार आता है। अगर किसी को आंखों के नीचे dark circles की शिकायत हो तो कपालभाती आसन उनके लिए संजीवनी है…  पेट की तकलीफ़ों से पीड़ित व्यक्ति भी कपालभाती कर के पेट के रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। कब्ज़, पेट दर्द,  खट्टी डकार, एसिडिटी और अन्य प्रकार की पेट की बीमारियां कपालभाती करने से खत्म हो जाती हैं।

सावधानियां

  1. कपालभाती प्रणायाम सुबह में करना लाभदायक है।
  2. शौच के बाद ही कपालभाती प्रणायाम करना चाहिए।
  3. कपालभाती करने के बाद आधे घंटे तक कुछ भी नही खाना चाहिए।
  4. सारण गाठ के रोगी, प्रेग्नेंट महिलाएं और गैस्टिक अल्सर के मरीज इस आसन को ना करें।
  5. शरीर में किसी भी प्रकार का ऑपरेशन कराया हो तो उन्हे डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही यह आसन करना चाहिए।

अनुलोम विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम करने का तरीका

सिद्धासन या सुखासन लगा कर सामान्य मुद्रा में बैठ जाएं…  फिर अपने दाएं हाथ को दाएं घुटने पर आराम से टीका दें, और बाएं हाथ के अंगूठे से अपने दाहिनी नासिका बंद कर बाई नासिका से गहरी सांस लें… और दाहिनी नासिका से सांस छोड़ दें… फिर बीच वाली अंगुली से बाई नासिका से गहरी सांस लें और दाहिने से छोड़ दे… इस प्रक्रिया को कम से कम दस से पंद्रह बार दोहराएं।

अनुलोम विलोम करने के लाभ

इस प्राणायाम को नाड़ी शोधन आसन भी कहा जाता है। अनुलोम विलोम शरीर में blood circulation दुरुस्त रखने में मददगार होता है। मानव शरीर में सब से ज़्यादा चर्बी, पेट, कमर और जाँघों के आसपास जमा होती है। इस आसन के प्रभाव से पेट अंदर हो जाता है। पेट की चर्बी भी घट जाती है। अनुलोम विलोम से शरीर में फुर्ती महसूस होती है, साथ ही शरीर का अतिरिक्त वज़न भी काबू में आ जाता है।

नौकासन योग

नौकासन करने का तरीका

नौकासन करने के लिए आकाश की ओर मुंह कर के पीठ के बल सीधे लेट जाएं… हाथों को सीधा कमर से सटा कर रखें, और अपनी हथेलियों को ज़मीन की और रखें…. अब धीरे धीरे अपनी गर्दन ऊपर की और ले जाएं और अपने हाथ सीधे रख कर गर्दन के साथ ऊपर उठाएं और साथ साथ उसी तरह अपने पैरों को भी उठाएं… और एक नौका का रूप ले लें। इसी मुद्रा में आप करीब पच्चीस से तीस सेकंड बने रहें। फिर धीरे धीरे सामान्य मुद्रा में चले जाएं। नौकासन को दो से तीन बार दोहराएं।

Note – शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द होने पर या, सामान्य से अधिक खिंचाव महसूस होने पर तुरंत सामान्य अवस्था में लौट जाएं

नौकासन के लाभ

पेट और नाभी के आसपास के भाग को सुडौल बनाने के लिए यह एक गुणकारी आसन है। इस आसन के प्रभाव से हमारी पाचन प्रणाली भी मज़बूत होती है। जब खाना ठीक से पाचन होता है तो शरीर में एक्सट्रा फैट जमा नहीं होता है और वज़न भी काबू में रहेता है। नौकाआसन करने से हमारी शरीर की छोटी आंत और बड़ी आंत को व्यायाम मिलता है। इस आसन को नित्य करने से आंतों से जुड़ी बीमारियाँ होने का खतरा नहीं रहेता है। और अगर किसी को आंतों से जुड़े रोग हैं तो वह व्यक्ति डॉक्टर की सलाह के बाद नित्य, नौकाआसन कर के आंतों के रोगों से मुक्ति पा सकता है।

योगा साइकलिंग

योगा साइकलिंग करने का तरीका

आसन बिछा कर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। अब अपने दोनों पैर ज़मीन से ऊपर उठा लें। जैसे आप real साइकल चलाते है ठीक वैसे ही गोल गोल पेडल हवा में चलाने लगें। याद रहे की यह आसन करते समय आप के दोनों हाथ सीधे ज़मीन से लगे होने चाहिये और हथेलियां ज़मीन की और होनी चाहिये। थोड़ी देर सीधी साइकलिंग करें, फिर उतनी ही देर तक उल्टी पेडलिंग करते हुए साइकलिंग करें। इस कसरत को सुबह के समय दस से पंद्रह मिनट तक करें। अधिक थकान महसूस होने पर बीच-बीच में break ले कर सामान्य मुद्रा में लेट कर आराम कर लें।

योगा साइकलिंग करने के लाभ

यह कसरत पैरों की चर्बी दूर करती है। योगा साइकलिंग करने से घुटनें मज़बूत होते हैं। और इस कसरत से हमारे abdominal muscles काफी strong बनते हैं।

सेतुबंध आसन

सेतुबंध आसन करने का तरीका

सेतुबंध आसन करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं। उसके बाद अपने दोनों घुटनों को एक साथ मोड़ कर दोनों पैरों के तलवों को ज़मीन पर अच्छे से जमा लें। फिर अपने दोनों हाथ सीधे रख कर ज़मीन पर लगा लें। अब सांस बाहर निकालते हुए back bone ज़मीन की और धीरे से दबाएं। अब गहरी सांस अंदर भरते हुए अपनें पैरों को ज़मीन पर दबाएं। अब अपने कमर के भाग को जितना हो सके उतना ऊपर की और उठाएं। इस अवस्था में करीब एक दो मिनट तक रहें… फिर सांस बाहर छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में लेट जाएं।

सेतुबंध आसन करने के लाभ

इस आसन से शरीर की रीड की हड्डी मज़बूत और सीधी होती है। कमर के भाग के लिए यह एक उत्तम कसरत है। सेतुबंध आसन से spine लचीला बन जाता है। इस आसन से गरदन तनाव मुक्त हो जाती है। शरीर की मांसपेशियां मज़बूत होती है…

सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार संपूर्ण योगासन है… इसे करने वालों को कोई और आसन करने की आवश्यकता नहीं रहती है।

सूर्य नमस्कार करने का तरीका

इस व्यायाम को बारह चरणों में किया जाता है:

सर्व प्रथम दोनों हाथ जोड़ कर सीधे खड़े रहें। सांस अंदर लेते हुए दोनों हाथों को प्रार्थना मुद्रा में जोड़ने के लिए उठाएं। अब दोनों हाथ जोड़ते ही सांस बाहर छोड़ें।

दूसरे चरण में अपने दोनों हाथों को सीधे रखते हुए ऊपर की ओर ले जाएं, और हो सके उतना पीछे की ओर मोड़ें। ध्यान रहे की कमर का संतुलन बना रहे। जब आप इस दूसरे चरण में हों तब सांस अंदर लें।

तीसरे चरण में सांस बाहर छोड़ते हुए आगे की और झुक जाएं… और अपने दाएं हाथ को दाएं पैर के पास हथेली ज़मीन की और करके लगाएं… और बाएं हाथ को बाएं पैर के पास हथेली ज़मीन की और कर के लगाएं… इस मुद्रा में भी थोड़ी देर खड़े रहें।

अब साँस अंदर लेते हुए अश्व संचालन मुद्रा में आ जाईए। अपना दाहिना पैर आगे करते हुए मुड़े घुटने के साथ ही दोनों हाथों के बीच ले आयें… अब बाई पैर का घुटना ज़मीन से लगा लें और अपने सिर को हो सके उतना ऊपर आकाश की और उठाने का प्रयत्न करें… इस मुद्रा में थोड़ी देर बने रहें…

अब सांस अंदर लेते हुए दंड आसन मुद्रा में आ जाएं… यानि कि अपना दाहिना पैर पीछे ले जाएं… दंड आसन में पूरा शरीर सपाट मुद्रा में होना चाहिये, और पूरे शरीर का भार हाथों और पैरों के पंजों पर होना चाहिये… इस मुद्रा में मुख सामने की और होना चाहिये…

छठे चरण में सांस बाहर छोड़ते हुए अष्टांग आसन में आ जाएं…

सातवे चरण में अब सांस अंदर लेते हुए भुजंग आसन में आ जाएं…

अब सांस बाहर छोड़ते हुए पर्वत आकार मुद्रा में आ जाएं… इस मुद्रा में हाथों और पैरों के पंजे ज़मीन पर लगे होते हैं… मुख ज़मीन की और हाथों की सीध में होता है…

नौवें चरण में फिर से अब सांस अंदर लेते हुए अश्व संचालन मुद्रा में आ जाईए… इस बार बायां पैर आगे करते हुए मुड़े घुटने के साथ ही दोनों हाथों के बीच ले आएं… अब दाहिने पैर के घुटने को ज़मीन से लगा लें…

दसवे चरण में सांस बाहर छोड़ते हुए आगे की और झुकें और हस्त पादआसन मुद्रा में आ जाएं…

ग्यारहवे चरण में सांस अंदर लें और हस्त उत्थान आसन में जाएं… यानि की बिल्कुल दूसरे चरण वाली मुद्रा में आ जाएं… हाथ ऊपर की और करके जितना हो सके उतने पीछे की और ले जाएं…कमर का संतुलन बनाए रखें… थोड़ी देर इस मुद्रा में स्थिर रहें…

बारह वे चरण में तड़ासन मुद्रा में आ कर सूर्य नमस्कार व्यायाम पूर्ण करें… तड़ासन में सांस बाहर छोड़ते हुए हाथ सीधे रख कर, मुख को सामने की और रख कर खड़ा होना होता है… इस आसन में शरीर भी सीधा रखें…

इनके अलावा भी कई सारे आसन शरीर को स्वस्थ और चुस्त रखने में मदद करते हैं। सबसे जरुरी बात होती है आसनों को सावधानी और नियम से करें… इसके अलावा खान पान पर भी द्यान देना योग की कड़ी में आता है…

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